Saturday, 30 April 2016

मातु मोहि दीजे कछु चीन्हा।
जैसें रघुनायक मोहि दीन्हा । ।
चूड़ामनि उतारि तब दयऊ ।
हरष समेत पवनसुत लयऊ । ।
"मोरें ह्रद्य परम संदेहा । 
सुनि कपि प्रगट कीन्हि निज देहा । । 
कनक भूधराकार सरीरा । 
समर भयंकर अतिबल बीरा । । 
सीता मन भरोस तब भयऊ ।
पुनि लघु रूप पवनसुत लयऊ । । "

Tuesday, 22 September 2015

“रुनक झुनक पग नेवर बाजे,




“रुनक झुनक पग नेवर बाजे,गजानन्द नाचे ।
आज म्हारे गणपति जी नाचे , आजम्हारे गजानंद नाचे।।
माता तुम्हारी है दुर्गाजी, सिंह चढ़ी गाजे ।। आज.....
पिता तुम्हारे है शिवशंकर, नान्देश्वर साजे ।। आज...
मूसक वाहन सूण्ड-सूण्डाला, एक दन्त साजे ।। आज...
गल पुष्पन को हार विराजे, कोटि काम लाजे ।। आज...
मूसक वाहन दुन्द दुन्दाला , अरुमोदक खाजे ।। आज...
विघ्न निवारण मंगल कारण, राजनपति राजे ।। आज...
तुलसीदास गणपतिजी न सुंमरयां, दुःख दारिद्र भाजे ।।
आज म्हारे गणपति जी नाचे , आजम्हारे गजानंद नाचे।।

Friday, 28 August 2015

happy raksha bandhan


भोले शंकर जी की आरती


जय शिव ओंकारा
 जय शिव ओंकारा, हर  शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज ते  सोहे ।
तीनो  रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ।
कंचन मृगमद लोचन भाले शशिधारी  ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ।
सनकादिक ब्र्ह्मादि  भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी ।
जगकर्ता जगहर्ता जगपालन करता 
ॐ जय शिव ओंकारा

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर के मध्ये यह तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा.